मुख्यपृष्ठ
गीता प्रवचन - विनोबा
अनमोल विचार
जीवन दर्शन
प्रारंभिक जीवन
गीताई
प्रेस वार्ता
नई पोस्ट
पुरानी पोस्ट
मुख्यपृष्ठ
लोकप्रिय विषय
योग विषयक समझ
सांख्ययोगौ पृथग्बालाः प्रवदन्ति न पंडिताः । एकमप्यास्थितः सम्यगुभयोर्विन्दते फलम् ।। 5.4 ।। बेसमझ लोग सांख्ययोग और कर्मयोग को अलग-अलग फल व...
आवश्यक कर्म
संभवतः एक पूर्ण संन्यासवादी का उत्तर यह होगा कि ऐच्छिक कर्मों के रूप में केवल भिक्षाटन, भोजन और ध्यान को ही स्वीकार करना होगा और वैसे इनके...
कर्म संन्यास
चन्दन सुकुमार सेनगुप्ता ज्ञान और भक्ति का सही सम्मलेन ही वह पड़ाव है जहाँ से कर्म को एक सही दिशा मिल जाया करेगी और व्यक्ति अपने ल...
आज का विषय