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गीता प्रवचन - विनोबा
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आवश्यक कर्म
संभवतः एक पूर्ण संन्यासवादी का उत्तर यह होगा कि ऐच्छिक कर्मों के रूप में केवल भिक्षाटन, भोजन और ध्यान को ही स्वीकार करना होगा और वैसे इनके...
योग विषयक समझ
सांख्ययोगौ पृथग्बालाः प्रवदन्ति न पंडिताः । एकमप्यास्थितः सम्यगुभयोर्विन्दते फलम् ।। 5.4 ।। बेसमझ लोग सांख्ययोग और कर्मयोग को अलग-अलग फल व...
त्रिगुण, श्रद्धा और कर्म
जिस धर्म, दर्शन, नैतिक नियम, सामाजिक विचार, सांस्कृतिक विचार में मैं श्रद्धा रखता हूँ वह मुझे मेरी अपनी प्रकृति तथा इसके कर्मों के लिये एक...
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