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गीता प्रवचन - विनोबा
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योग विषयक समझ
सांख्ययोगौ पृथग्बालाः प्रवदन्ति न पंडिताः । एकमप्यास्थितः सम्यगुभयोर्विन्दते फलम् ।। 5.4 ।। बेसमझ लोग सांख्ययोग और कर्मयोग को अलग-अलग फल व...
आवश्यक कर्म
संभवतः एक पूर्ण संन्यासवादी का उत्तर यह होगा कि ऐच्छिक कर्मों के रूप में केवल भिक्षाटन, भोजन और ध्यान को ही स्वीकार करना होगा और वैसे इनके...
सहभागिता का विज्ञान
वस्त्रोत्पादन करने वाले यदि यह चाहें कि उनको सस्ता अन्न मिले, तो अन्न पैदा करने वालों को भी सस्ता कपड़ा मिले, इसकी व्यवस्था उनको करनी चाहिए।...
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