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योग विषयक समझ
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आवश्यक कर्म
संभवतः एक पूर्ण संन्यासवादी का उत्तर यह होगा कि ऐच्छिक कर्मों के रूप में केवल भिक्षाटन, भोजन और ध्यान को ही स्वीकार करना होगा और वैसे इनके...
आत्म तत्व
जीवात्मा परमात्मा का अंश है- ‘ममैवांशो जीवलोके’। इसलिये जब उसमें अपने अंशी परमात्मा को प्राप्त करने की भूख जाग्रत होती है और उसकी पूर्ति न...
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