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सांख्ययोगौ पृथग्बालाः प्रवदन्ति न पंडिताः । एकमप्यास्थितः सम्यगुभयोर्विन्दते फलम् ।। 5.4 ।। बेसमझ लोग सांख्ययोग और कर्मयोग को अलग-अलग फल व...
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संभवतः एक पूर्ण संन्यासवादी का उत्तर यह होगा कि ऐच्छिक कर्मों के रूप में केवल भिक्षाटन, भोजन और ध्यान को ही स्वीकार करना होगा और वैसे इनके...
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श्रद्धावाँल्लभते ज्ञानं तत्परः संयतेन्द्रियः । ज्ञानं लब्ध्वा परां शांतिमचिरेणाधिगच्छति ।।4.39 ।। जो जितेंद्रिय तथा साधन- परायण है, ऐसा ...
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