सदस्यता लें
टिप्पणियाँ (Atom)
लोकप्रिय विषय
-
सांख्ययोगौ पृथग्बालाः प्रवदन्ति न पंडिताः । एकमप्यास्थितः सम्यगुभयोर्विन्दते फलम् ।। 5.4 ।। बेसमझ लोग सांख्ययोग और कर्मयोग को अलग-अलग फल व...
-
जिस धर्म, दर्शन, नैतिक नियम, सामाजिक विचार, सांस्कृतिक विचार में मैं श्रद्धा रखता हूँ वह मुझे मेरी अपनी प्रकृति तथा इसके कर्मों के लिये एक...
-
जिसे हम सामान्यतः जीव या आत्मा कहते हैं वह हमारे अंदर रहने वाला कामनामय पुरुष है जो प्रकृति के कार्यों पर पुरुषचैतन्य का प्रतिबिम्ब है। यथ...
आज का विषय